राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण के बारे में
भारत सरकार के 29 अगस्त, 1997 के संकल्प के माध्यम से औषध विभाग (डीओपी), रसायन और उर्वरक मंत्रालय के एक संलग्न कार्यालय के रूप में औषधियों के मूल्य निर्धारण के लिए और वहनीय मूल्यों पर औषधियों की उपलब्धता और पहुंच सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र विनियामक के तौर पर राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) का गठन किया गया था। एनपीपीए की प्रमुख जिम्मेदारियों में औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ) के प्रावधानों के अनुसार औषधियों की कीमतें तय करना और संशोधित करना, औषधियों के अनुपालन और उपलब्धता की निगरानी करना और औषधि नीतियों पर सलाह देना शामिल है। वर्तमान में, एनपीपीए उसे प्रत्यायोजित शक्तियों के अनुसार औषध विभाग (डीओपी) द्वारा जारी औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश, 2013 को लागू कर रहा है।
एनपीपीए डीपीसीओ की अनुसूची-I के तहत अधिसूचित सभी औषधियों का अधिकतम मूल्य निर्धारित करता है और अब तक इसने 928 अनुसूचित फॉर्मूलेशनों के अधिकतम मूल्य और लगभग 3111 नई औषधियों के खुदरा मूल्य को निर्धारित किया है। डीपीसीओ, 2013 के पैरा 19 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करके एनपीपीए ने जनहित में 106 मधुमेह और कार्डियो वैस्कुलर औषधियों; कोरोनरी स्टेंट और घुटना प्रत्यारोपण की कीमतों को विनियमित किया है। फरवरी, 2019 में, एनपीपीए ने व्यापार मार्जिन युक्तिकरण के तहत 42 कैंसर रोधी गैर-अनुसूचित औषधियों की कीमतों को विनियमित किया, जिसके परिणामस्वरूप 526 ब्रांडों के मामले में 90% तक की बचत हुई। कोविड महामारी के दौरान भी, एनपीपीए ने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और पांच अन्य चिकित्सा उपकरणों जैसे पल्स ऑक्सीमीटर, ब्लड प्रेशर मॉनीटरिंग मशीन, नेबुलाइजर, डिजिटल थर्मामीटर और ग्लूकोमीटर के व्यापार मार्जिन को सीमित कर दिया था ताकि उनकी वहनीयता सुनिश्चित हो सके।
भारतीय औषध उद्योग वैश्विक औषध परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है और मात्रा के हिसाब से औषध उत्पादन में वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है और आज इसे दुनिया की फार्मेसी के तौर पर विशिष्ट स्थान दिया गया है। यह विकासशील देशों के लिए जेनेरिक, टीके और एंटी-रेट्रोवायरल औषधियों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। अपने आकार(साईज) के संदर्भ में, भारतीय औषध उद्योग का वर्तमान मूल्य $ 50 बिलियन है और 2030 तक $ 130 बिलियन तक पहुँचने की उम्मीद है। इसलिए, भारतीय फार्मा को सशक्त करना और व्यवसायों के लिए समान अवसर प्रदान करना महत्वपूर्ण है।
इसके साथ ही, भारत में परिवारों के गरीबी रेखा से नीचे चले जाने का सबसे बड़ा कारण औषधियों पर होने वाला खर्च है। भारत सरकार ने औषधियों को इसके विनियमन को सक्षम करने के उद्देश्य से इसे आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 के तहत रखा है। सरकार आवश्यक और जीवनरक्षक औषधियों तक पहुंच में सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध है क्योंकि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य की गुणवत्ता और समाज के कमजोर वर्गों की आर्थिक व्यवहार्यता को भी प्रभावित करता है।
एनपीपीए डीपीसीओ के दायरे में उपभोक्ताओं और फार्मा उद्योग के हितों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करता है। एनपीपीए मूल्य निगरानी और अनुसंधान इकाइयों (पीएमआरयू) के माध्यम से राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों में सशक्तिकरण, निगरानी और सार्वजनिक जागरूकता के लिए दिल्ली के बाहर विस्तार कर रहा है। वर्तमान में, 31 राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों में पीएमआरयू स्थापित किए गए हैं।
एनपीपीए के पास औषध की कीमतों की जानकारी और सार्वजनिक शिकायतें दर्ज करने के लिए ‘फार्मा सही दाम’ और ‘फार्मा जन समाधान’ प्लेटफॉर्म हैं। एनपीपीए की एक पहल एकीकृत सार्वजनिक डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली (आईपीडीएमएस) 2.0 एक व्यापक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे औषधि उत्पादों और चिकित्सा उपकरणों के मूल्यों का प्रबंधन, विनियमन और निगरानी करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह प्रणाली औषध और औषध चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
एक विनियामक के रूप में एनपीपीए की भूमिका औषधियों को सुलभ और वहनीय बनाकर एक स्वस्थ राष्ट्र निर्माण की दिशा में काम करना है, साथ ही भारतीय औषध उद्योग को विश्व नेता के रूप में विकसित करने के लिए सक्षम वातावरण बनाना है। एनपीपीए इस प्रयास में सभी हितधारकों का सहयोग चाहता है।